Tuesday, September 30, 2014

गाँधी जयंती


mahatmagandhi

2nd October 2014


दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल ……


सत्य और अंहिसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 में हुआ । जिसे हम राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाते हैं, और दुनिया भर के लोग अंतराष्ट्रीय अंहिसा दिवस के रुप मनाते हैं। इनका जन्म गुजरात के पोरबन्दर शहर में हुआ था। इनके पिता कर्मचन्द गाँधी राजकोट के दिवान थे तथा माता पुतली देवी अत्यन्त धार्मिक विचारों वाली महिला थी। विद्यार्थी जीवन में ही इनका विवाह कस्तूरबा गाँधी से हो गया था।


गाँधी जी ने कुछ साल दक्षिण अफ़्रीका में बिताए थे। यहाँ पहली बार गाँधी जी ने सत्याग्रह का प्रयोग किया था। दक्षिण अफ़्रीका से लौटने के बाद गाँधी जी ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में गाँधी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वतन्त्रता संग्राम की शुरुआत गाँधी जी ने सत्याग्रह और डांडी मार्च से शुरु किया । सत्य और अंहिसा को आधार बनाकर राजनीतिक स्वतन्त्रता का आन्दोलन छेड़ा । उन्होंने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध असहयोग आंदोलन किया। विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। हिंसा के कारण गाँधी जी ने आन्दोलन वापिस ले लिया। सन् 1929 में गाँधी जी ने 'नमक-सत्याग्रह' नाम से आंदोलन किया। गाँधी जी ने स्वयं साबरमती आश्रम से डांडी तक पैदल यात्रा की तथा वहाँ नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन किया। सन् 1942 में उन्होनें भारत छोड़ो आन्दोलन छेड़ दिया। देश-भर में क्रान्ति की ज्वाला सुलगने लगी। देश का बच्चा-बच्चा अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फ़ेकने पर उतारु हो गया। गाँधी जी के अथक प्रयासों के परिणाम स्वरुप 15 अगस्त सन् 1947 को हमारा देश स्वतन्त्र हो गया।

गाँधी जी ने छुआ-छूत, जाति-पाति, मदिरापान आदि का घोर विरोध किया। उन्होंने स्वदेशी पर बल दिया। राजनीति में नैतिकता को स्थान दिया। उन्होंने ग्रामीण विकास को ध्यान में रखते हुए लघु उद्योगों को लगाने की दिशा प्रदान की। वे कुशल राजनीतिज्ञ और महान संत थे। बापू की तरह शायद ही कोई और इस पृथ्वी पर जन्म लेगा। महात्मा गाँधी का व्यक्तित्व, उनके विचार तथा देश की स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए गए उनके संघर्ष उन्हें विश्व के महानतम् व्यक्तियों की ऐसी श्रेणी में खड़ा करते हैं, जहाँ उनकी बराबरी करने वाले कोई नहीं हैं। महात्मा गाँधी जी का सादा जीवन तथा अद्भुत व्यक्तित्व के सामने केवल देशवासी ही नहीं वरन् विदेशी लोग भी नतमस्तक हुए हैं। भले ही आज महात्मा गाँधी हमारे बीच नही हैं, लेकिन गाँधी जी के विचारों से पूरा विश्व प्रेरित होता रहेगा।